यह प्राकृतिक प्रदेश छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग में फैला हुआ है जिसका क्षेत्रफल 21803 वर्ग किलोमीटर है ,जो छत्तीसगढ़ के कुल क्षेत्रफल का लगभग 16% है। इस प्राकृतिक प्रदेश में कोरिया ,सरगुजा ,सूरजपुर, बलरामपुर जिले शामिल होते हैं ।सर
गुजा और बलरामपुर का पठारी भाग जशपुर सामरी पाट में और जो मैदानी भाग है उसे सरगुजा बेसिन में शामिल किया जाता है।
पूर्वी बघेलखंड का पठार
इस टॉपिक को विडियो की मदद से समझें :-
इस प्राकृतिक प्रदेश की निम्न विशेषताएं हैं:-
भूगर्भिक बनावट:- सरगुजा बेसिन कि भूगर्भिक बनावट गोंडवाना शैल से बनी हुई है इसी कारण इस भाग में कोयला खनिज मुख्य रूप से पाया जाता है।
ढाल:- सरगुजा बेसिन की ज्यादातर नदियां उत्तर की ओर बहती है इससे हम अंदाज लगा सकते हैं इसकी ढाल या झुकाव उत्तर की ओर है।
प्रमुख खनिज:- सरगुजा बेसिन की प्रमुख खनिजों की बात करेें तो कोयला मुख्य खनिज है ।कोरिया जिला का सोहागपुर ,चिरमिरी ,सोनाहट एवं सूरजपुर जिला का बिश्रामपुर और बलरामपुर जिला का रामाकोला ,तातापानी मे कोयलेे की भंडार है।
अपवाह तंत्र :-इस क्षेत्र से निकलने वाली प्रमुख नदियां रिहंद,बनास, नेउर हैं जो उत्तर की ओर बहते हुए सोन नदी में मिल जाती है और सोन नदी गंगाा नदी मैं मिल जाती है अतः हम कह सकते हैं यह क्षेत्र सोन गंगा नदी अपवाह तंत्र में शामिल है।
प्रमुख वनस्पति:- इस प्राकृतिक प्रदेश में उष्ण कटिबंध आर्द्र वनस्पति पाई जाती है जिसमें से साल प्रमुख वनस्पति है यह क्षेत्र बांस के लिए भी जाना जाता है।
प्रमुख पर्वत:-चांगभाखर देवगढ़ की पहाड़ी प्रमुख पर्वत है जोकि विंध्याचल पर्वत श्रेणी का एक भाग है । देवगढ़़ की पहाड़ी कोरिया ,सूरजपुर ,बलरामपुर जिला मेंं फैला हुआ है। इस की सबसे ऊंची चोटी देवगढ़ है ,जिसकी ऊंचाई 1033 मीटर है ।देवगढ़ की पहाड़ी से हसदेव नदी निकलती है।
प्रमुख मिट्टी:- इस प्राकृतिक प्रदेश की मिट्टी मुख्यता लाल पीली मिट्टी जिसमें धान की खेती की जाती है भांग के अलावा यह क्षेत्र मक्का के लिए भी प्रसिद्ध है।
No comments:
Post a Comment