cgvyapam exam - छग सहायक ग्रेड ३ व् डाटा एंट्री आपरेटर सयुंक्त भर्ती परीक्षा -(ADGO, SDGO) , छग राजस्व एवं आपदा विभाग - राजस्व निरीक्षक (CG REVANUE INSPECTOR) , पटवारी परीक्षा , छग लोक शिक्षण संचनालय - व्याख्याता पंचायत , शिक्षक , सहायक शिक्षा , प्रयोग शाला सहायक , छग श्रम निरीक्षक(LABOUR INSPECTOR) परीक्षा , छग संपरीक्षक परीक्षा (AUDITOR एग्जाम ),हॉस्टल वार्डन परीक्षा एवं छग पीएससी(CGPSC) परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह .
Showing posts with label indian modern history. Show all posts
Showing posts with label indian modern history. Show all posts
मराठा साम्राज्य - 2
मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक एवं आर्थिक व्यवस्था
शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था -
शिवाजी के विजित क्षेत्र को स्वराज के नाम से जाना जाता था .यह 4 प्रमुख प्रान्तों में बंटा था -- उत्तरी प्रान्त - सूरत से पूना तक का क्षेत्र .
- दक्षिणी पश्चिमी प्रान्त - बम्बई से कोंकण तक का क्षेत्र .
- दक्षिणी पूर्वी प्रान्त - सतारा , कोल्हापुर ,बेलगाँव एवं थरवार का क्षेत्र .
- दक्षिणी प्रान्त - जिंजी एवं उसके आस पास का क्षेत्र .
शिवाजी की मंत्रिमंडल
मराठा साम्राज्य का पूरा सञ्चालन एक मत्रियों का समूह के माध्यम से किया जाता था , जिसे 'अष्ट प्रधान' नाम से जाना जाता था -
| पेशवा | प्रधानमंत्री - राज्य का प्रशासन एवं अर्थव्यवस्था का देख रेख |
| सर ए नौबत | सेनापति - सैन्य सम्बन्धी कार्य |
| अमात्य या मजुमदार | राजस्व मंत्री - आय व्यय का लेखा जोखा तयार करता था |
| वकयानिस | गुप्तचर एवं संचार विभाग प्रमुख |
| चिटनिस | चिट्ठी /डाक विभाग प्रमुख |
| सुमंत या दबीर | विदेश मंत्री |
| पंडित राव या दनाद्यक्ष | धार्मिक मंत्री |
| न्यायधीश | न्याय विभाग के प्रमुख |
शिवाजी की कर व्यवस्था
भूमिकर ,चौथ एवं सरदेशमुखी राजस्व के प्रमुख स्रोत थे .इसके अतिरिक्त व्यापर पर कर , उद्योग पर कर , युद्ध में प्राप्त धन , भेंट से भी राजस्व के स्रोत थे .
- भूमिकर - शिवाजी की कर व्यवस्था मालिक अम्बर की कर व्यवस्था पर आधारित थी .भूमि मापने के लिए काठी ईवा मानक छड़ी का प्रयोग किया जाता था .
- चौथ - अपने पडोसी राज्यों से आक्रमण ना करने या आक्रमण से बचाने के लिया जाने वाला कर जो कुल राजस्व का एक चौथाई लिया जाता था .
- सरदेशमुखी - अपने विजित क्षेत्र या अधीन क्षेत्र से लिया जाने वाले कर कुल राजस्व का 10 % लिया जाता था .
शिवाजी की सैन्य व्यवस्था
- पागा सेना - यह शिवाजी की नियमित एवं स्थायी वैतनिक घुड़सवार सेना थी .
- सिहलदार सेना - यह शिवाजी की अस्थायी अवैतनिक घुड़सवार सेना थी .जिसे जरुरत पड़ने पर बुलाया जाता था .
- पैदल सेना - यह पैदल सेना थी .
इसके अलावा सेना में गुप्तचर ,तोपखाना एवं समुद्री बड़ों की भी व्यवस्था थी .
मराठा सम्राज्य के प्रमुख पेशवा
प्रथम पेशवा -बालाजी विश्वनाथ (1720 ई में मृत्यु )
- इन्होने तात्कालिक मुग़ल सम्राट फरूखसियर से समझौता किया .इस समझौते को मराठों का 'मेघना काटा' कहा जाता है .
- इसे लड़ाकू पेशवा के नाम से जाना जाता है .
- शिवाजी के बाद गोरिल्ला युद्ध के प्रतिपादक
- मस्तानी नामक महिला से संबंध होने के कारण चर्चित रहा .
तृतीय पेशवा - बालाजी बाजीराव (1740 - 1761 ई)
- इन्हें नाना साहब के नाम से जाना जाता है .
- इसके शासनकाल में पानीपत का तृतीय युद्ध हुआ था .
पानीपत का तृतीय युद्ध - 1761 ई
मराठा विरुद्ध अहमदशाह अब्दाली
मराठा सेनापति - विश्वास राव व् सदाशिव राव
परिणाम - मराठों का पराजय
चतुर्थ पेशवा - माधवराव प्रथम(1761-1772 ई )
- इसने तात्कालिक मुग़ल शासक शाह आलम को पुनः दिल्ली पर बिठाया .
- क्षय रोग से इसकी मृत्यु .
पंचम पेशवा - नारायण राव प्रथम (1772-73 ई )
- माधव राव प्रथम का भाई था .
- चाचा रघुनाथ राव के द्वारा हत्या .
छठा पेशवा - रघुनाथ राव (1773-74 ई )
सातवाँ पेशवा - माधव राव नारायण राव द्वितीय(1774-95 ई )
- नारायण राव का अल्पव्यस्क पुत्र था .
- अल्पव्यस्क होने के कारण शासन का दायित्व बारभाई नाम के 12 सदस्यों की एक परिषद् करती थी .
- इसके शासनकाल में प्रथम आंगल मराठा युद्ध हुआ था .
अंतिम पेशवा - बाजीराव द्वितीय (1795-1818 ई )
- रघुनाथ राव का पुत्र था .
- इसके शासन काल में द्वितीय एवं तृतीय आंगल मराठा युद्ध हुआ था .
आंगल मराठा युद्ध
| प्रथम आंगल मराठा युद्ध |
|
| द्वितीय आंगल मराठा युद्ध |
|
| तृतीय आंगल मराठा युद्ध |
|
आंगल मराठा युद्ध के दौरान हुई प्रमुख संधियाँ -
सुरत की संधि - 1775ई
पुरंदर की संधि - 1776 ई
बडगांव की संध - 1779 ई
सालबई की संधि - 1782 ई
बसीन की संधि - 1802 ई
देवगांव की संधि - 1803 ई
सुर्जी अर्जुन गाँव की संधि - 1803 ई
राजपुर घाट की संधि - 1804 ई
नागपुर की संधि - 1816 ई
ग्वालियर की संधि - 1817 ई
पूना की संधि - 1817 ई
मंदसौर की संधि - 1818 ई
आधुनिक भारत का इतिहास - मराठा साम्राज्य
शिवाजी का संक्षिप्त परिचय :-
जन्म - 1627 ई शिवनेर किला , महाराष्ट्र
पिता - शाहजी भोंसले
माता - जीजा बाई
अध्यात्मिक गुरु - रामदास
राजनीतिक गुरु - दादा कोंडदेव
पत्नी - साईं बाई व् सायरो बाई
महतवपूर्ण घटनाएँ -
- सन 1643 ई में सिंह गढ़ किला को जीता .
- सन 1644 ई में तोरण के किला को जीता .
- सन 1646 ई रायगढ़ के किला को जीता .
- सन 1648 ई में बीजापुर से पुरंदर की किला को जीता .
- सन 1656 ई में रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाई.
- सन 1656 ई में ही जबाली के किला जीतकर सामरिक एवं आर्थिक दृष्टि से मजबूत हुए .
- सन 1665 ई में शिवाजी एवं जयसिंह के बीच युद्ध .
- सन 1665 ई में पुरंदर की संधि
- सन 1664 ई - सूरत की पहली लूट
- सन 1670 ई - सूरत की दूसरी लूट
- सन 1674 ई - पंडित गंगाभट्ट के द्वारा शिवाजी को राज्याभिषेक किया और उन्हें छत्रपति की उपाधि मिला
- सन 1680 ई - मृत्यु
प्रमुख युद्ध :-
- सन 1659 ई बीजापुर के शासक ने अफजल खान को शिवाजी से युद्ध करने हेतु भेजा और वह मारा गया.
- सन 1660 ई में मुग़ल शासक ओरंगजेब ने शाइस्ता खान को शिवाजी का दमन करने हेतु भेजा किन्तु वह मारा गया .
- सन 1665 ई में ओरंगजेब ने शाइस्ता खान के मारे जाने के बाद जयपुर के शासक जयसिंह को युद्ध करने हेतु भेजा.युद्ध उपरांत शिवाजी को हार हुई .
- शिवाजी एवं जयसिंह के पुरंदर की संधि हुई .
पुरंदर की संधि - सन 1665 ई
- शिवाजी(मराठा) एवं जयसिंह(मुग़ल) के बीच संधि हुई .
- इस संधि के तहत शिवाजी ने मुगलों से छीने २३ किला वापस कर दिया .
- शिवाजी को अपने पुत्र शम्भाजी को मुग़ल दरबार में भेजने हेतु सहमति दे दी .
अब नीचे दिए प्रश्नों का उत्तर दीजिये -
1857 की क्रांति से प्रतियोगी परीक्षा में अक्सर पूछने वाली महतवपूर्ण बातें
1857 की विद्रोह के कारण -
- राजनीतिक कारण - वेलेजली की सहायक संधि , डलहौजी की हड़प नीति एवं राजाओं के पेंशन एवं उपाधियों का अंत जैसी नीतियों ने भारतीय राजाओं को विद्रोह करने पर मजबूर के दिया .
- सामाजिक कारण - अंग्रेजों ने सती प्रथा , नरबली प्रथा, विधवा पुनर्विवाह अंत करने हेतु कानून बनाया .अंगेरजी शिक्षा नीति एवं रंग भेद की नीति ने भारतीयों को नाराज कर दिया .
- धार्मिक कारण -इसाई धर्म का प्रचार , इसाई धर्मावलम्बियों को सरकारी नौकरियों में पद उन्नति एवं रियायत
- सैनिक कारण - जनरल लिस्टमेंट एक्ट लागु करना एवं सैनिकों के लिए निःशुल्क डाक व्यवस्था को समाप्त करना .
- तात्कालिक कारण - एनफील्ड रायफल जिसमे चर्बी वाले कारतूस का प्रयोग .
प्रमुख घटनाएँ -
29 मार्च 1857 - बैरकपुर छावनी में मंगल पाण्डेय ने विद्रोह कर दिया .
08 अप्रैल 1857 - मंगल पाण्डेय को फांसी
10 मई 1857 - मेरठ छावनी के सैनिकों द्वारा विद्रोह कर दिया .
11 मई 1857 - मेरठ छावनी के सैनिकों ने दिल्ली पर अधिकार कर मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जाफर को विद्रोहिओं का नेता घोषित किया .
31 मई 1857 - सम्पूर्ण देश में विद्रोह की तिथि घोषित .
विद्रोह का क्षेत्र -
| स्थान | नेतृत्वकर्ता | दमन |
| दिल्ली | बहादुर शाह जफ़र , बख्त खा | कर्नल निगाल्सन एवं लोरेंस बंधू |
| झाँसी | लक्ष्मी बाई | ह्यूरोज |
| ग्वालियर | तात्या टोपे | ह्यूरोज |
| कानपुर | नाना साहब | कैंप वेल |
| लखनऊ | बेगम हजरत महल | कैंप बेल |
| इलाहबाद | लियाकत अली | कर्नल नील |
| जगदीशपुर | कुंवर सिंह , अमर सिंह | विलियम टेलर |
| फ़ैजाबाद | मौलवी अहमदुल्ला | कैंप वेल |
| बरेली | खान बहादुर खान | कैंप वेल |
अब नीचे दिए प्रश्नों का उत्तर देवें -
आधुनिक भारत का इतिहास - 1857 की क्रांति
छग व्यापम एवं पीएससी परीक्षा की तयारी के लिए टॉपिक वाइज महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह किया गया है . इन प्रश्नों को हल कर छग व्यापम की पटवारी , आर आइ , एस आइ भर्ती, सहायक ग्रेड ३ , डाटा एंट्री एवं छग पीएससी के द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर सकते है .
Subscribe to:
Comments (Atom)

