छग सामान्य ज्ञान - छग का भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार

छग की अंक्षाशीय एवं देशंतारीय विस्तार - 



  • 17'46" (कोंटा ,सुकमा जिला ) से 24'5" (सुंदरी गाँव , बलरामपुर जिला  ) उत्तरी अंक्षाश तक 
  • 80'15" (भद्रकाली , बीजापुर ) से 84'25" (गिरला , जशपुर ) पूर्वी देशांतर तक 



कर्क रेखा (23'1/2")  - छग के कुल 4 जिलों से होकर गुजरती है - मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर , कोरिया (सबसे कम ), सूरजपुर , बलरामपुर (सर्वाधिक )

भारतीय मानक समय रेखा (82'1/2") छग के 7 जिलों से होकर गुजरती है - कोरिया , सूरजपुर ,कोरबा  , जांजगीर चंपा , बलौदाबाजार , महासमुंद , गरियाबंद ,.
 कर्क रेखा एवं भारतीय मानक समय रेखा एक दुसरे को कोरिया जिले के सोनहत क्षेत्र की बालम की पहाड़ी में काटता है .





नोट्स -
  • छग का सबसे पूर्ववर्ती बिंदु एवं  जिला  - गिरला , जशपुर जिला 
  • छग का सबसे पश्चिमी बिंदु एवं जिला - भद्रकाली , बीजापुर जिला 
  • छग का सबसे उत्तरवर्ती बिंदु एवं जिला - सुंदरी गाँव , बलरामपुर जिला
  • छग का सबसे दक्षिणतम बिंदु एवं जिला - कोंटा ,सुकमा जिला
  • छग का उत्तर से दक्षिण तक की लम्बाई - 700 से 800 किलोमीटर 
  • छग पूर्व से पश्चिम की लम्बाई - 435 किलोमीटर 
Here are 10 MCQs based on the provided information about Chhattisgarh's latitudinal and longitudinal expansion:

1. छत्तीसगढ़ का उत्तरी अक्षांशीय विस्तार किस स्थान से किस स्थान तक है?
a) 17'46" से 24'5" उत्तरी अंक्षाश तक 
b) 15'30"  से 26'10" उत्तरी अंक्षाश तक 
c) 18'15" से 23'50" उत्तरी अंक्षाश तक 
d) 20'00" से 24'10" उत्तरी अंक्षाश तक 

उत्तर: a) 17'46"  से 24'5" उत्तरी अंक्षाश तक 
व्याख्या: छत्तीसगढ़ का उत्तरी अक्षांशीय विस्तार कोंटा (सुकमा जिला) से सुंदरी गाँव (बलरामपुर जिला) तक है।


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2. छत्तीसगढ़ का देशांतर विस्तार किस बिंदु से किस बिंदु तक है?
a) 79'15"  से 85'30" पूर्वी देशांतर तक 
b) 81'25" से 83'20" पूर्वी देशांतर तक 
c) 80'15"  से 84'25" पूर्वी देशांतर तक 
d) 78'50"से 85'15" पूर्वी देशांतर तक 

उत्तर: c) 80'15"  से 84'25"पूर्वी देशांतर तक 
व्याख्या: छत्तीसगढ़ का देशांतर विस्तार भद्रकाली (बीजापुर जिला) से गिरला (जशपुर जिला) तक है।


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3. कर्क रेखा छत्तीसगढ़ के कितने जिलों से होकर गुजरती है?
a) 3
b) 4
c) 5
d) 6

उत्तर: b) 4
व्याख्या: कर्क रेखा छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों से होकर गुजरती है।


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4. छत्तीसगढ़ के किस जिले से कर्क रेखा सबसे कम गुजरती है?
a) बलरामपुर
b) सूरजपुर
c) कोरिया
d) महासमुंद

उत्तर: c) कोरिया
व्याख्या: कर्क रेखा छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से सबसे कम गुजरती है।


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5. भारतीय मानक समय रेखा छत्तीसगढ़ के कितने जिलों से होकर गुजरती है?
a) 5
b) 6
c) 7
d) 8

उत्तर: c) 7
व्याख्या: भारतीय मानक समय रेखा छत्तीसगढ़ के 7 जिलों से होकर गुजरती है।


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6. छत्तीसगढ़ के कौन से जिले से कर्क रेखा और भारतीय मानक समय रेखा एक-दूसरे को काटते हैं?
a) कोरिया
b) सूरजपुर
c) जशपुर
d) बलरामपुर

उत्तर: a) कोरिया
व्याख्या: कर्क रेखा और भारतीय मानक समय रेखा एक-दूसरे को कोरिया जिले के सोनहत क्षेत्र की बालम की पहाड़ी में काटते हैं।


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7. छत्तीसगढ़ का सबसे पूर्वी बिंदु कौन सा है?
a) सुंदरी गाँव, बलरामपुर
b) गिरला, जशपुर
c) कोंटा, सुकमा
d) भद्रकाली, बीजापुर

उत्तर: b) गिरला, जशपुर
व्याख्या: गिरला, जशपुर जिला छत्तीसगढ़ का सबसे पूर्वी बिंदु है।


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8. छत्तीसगढ़ का सबसे पश्चिमी बिंदु कौन सा है?
a) सुंदरी गाँव, बलरामपुर
b) गिरला, जशपुर
c) कोंटा, सुकमा
d) भद्रकाली, बीजापुर

उत्तर: d) भद्रकाली, बीजापुर
व्याख्या: भद्रकाली, बीजापुर जिला छत्तीसगढ़ का सबसे पश्चिमी बिंदु है।


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9. छत्तीसगढ़ का सबसे उत्तरी बिंदु कौन सा है?
a) सुंदरी गाँव, बलरामपुर
b) गिरला, जशपुर
c) कोंटा, सुकमा
d) भद्रकाली, बीजापुर

उत्तर: a) सुंदरी गाँव, बलरामपुर
व्याख्या: सुंदरी गाँव, बलरामपुर जिला छत्तीसगढ़ का सबसे उत्तरी बिंदु है।


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10. छत्तीसगढ़ का उत्तर से दक्षिण तक का विस्तार कितने किलोमीटर का है?
a) 300 से 400 किलोमीटर
b) 500 से 600 किलोमीटर
c) 700 से 800 किलोमीटर
d) 900 से 1000 किलोमीटर

उत्तर: c) 700 से 800 किलोमीटर
व्याख्या: छत्तीसगढ़ का उत्तर से दक्षिण तक का विस्तार 700 से 800 किलोमीटर है।



सामान्य ज्ञान - भारत का प्राचीन कालीन इतिहास - प्रागैतिहासिक काल का इतिहास - पार्ट - 2

 मध्य पाषाणकाल (10000-6000 ई. पू.) - 

मध्य पाषाण कल संक्रमण का काल था जिसमे पुरानी जलवायु की समाप्ति हुई एवं नई जलवायु का प्रारंभ हुआ जिसकी वजह से मानव के औजार , शिकार के तरीके तथा अन्य गतिविधियों में कई परिवर्तन देखने को मिला .



इस काल की प्रमुख विशेषताएं निम्न है - 

  • औजार - इस काल में दूर से फेंक कर मारने वाले तकनीक का विकास हुआ जैसे तीर , धनुष एवं भाले . पत्थर के छोटे छोटे औजारों का निर्माण किया गया जो त्रिकोण , अर्धचन्द्राकार एवं समलम्ब आकृति के थे 
  • शिकार एवं भोजन - मानव मुख्यतः शिकारी एवं संग्रहकर्ता ही था किन्तु शिकार करने के तरीकों में बदलाव हुआ . अब बड़े जानवरों के अलावा छोटे जानवर मछली व् पक्षियों का शिकार करने लगा .
  • कृषि एवं पशुपालन का प्रारंभ इसी काल से हुआ . सर्वप्रथम कुत्ते को पालतू पशु बनाया गया .
प्रमुख स्थल - 
  • नागौर (राजस्थान ) एवं आदमगढ़ (मध्यप्रदेश ) से पशुपालन के साक्ष्य .
  • मध्य गंगा घाटी (बेलन घाटी ) के सरायनाहरराय , चोपनीमांडो , मह्दरा से अस्थायी आवास , पशुपालन व् शव दफ़नाने का साक्ष्य मिले है .


नवपाषाण काल (6000-1000 ई. पू.)

  • आग की खोज और कुत्ते को पालतू बनाना इस काल की विशेषताएं हैं।
  • पॉलिश किए हुए पत्थर के औजारों का प्रयोग होता था।
  • इस काल में कृषि का आरंभ हुआ, और गर्त आवास (जैसे बुर्जहोम से प्राप्त) विकसित हुए।
  • अस्थि के औजार, पोत निर्माण, स्थायी जीवन और समाज का निर्माण इस काल में हुआ।
  • मानव शवों के साथ कुत्ते को दफनाने की प्रथा भी देखी गई।


मध्य पाषाण काल (10000-6000 ई. पू.) और नवपाषाण काल (6000-1000 ई. पू.) से संबंधित MCQs:

MCQs for Middle Stone Age (10000-6000 BCE)


1. मध्य पाषाण काल के औजारों की कौन सी विशेषता सही है?

a) तीर और धनुष का विकास

b) केवल बड़े पत्थर के औजारों का प्रयोग

c) कोई भी हथियार नहीं था

d) धातु के औजारों का प्रयोग

उत्तर: a) तीर और धनुष का विकास

व्याख्या: मध्य पाषाण काल में तीर, धनुष और भाले जैसे दूर से फेंकने वाले औजारों का विकास हुआ, जो त्रिकोण, अर्धचन्द्राकार और समलम्ब आकार के छोटे पत्थर के होते थे।

2. निम्नलिखित में से किस स्थल से पशुपालन के प्रमाण मिले हैं?

a) आदमगढ़

b) मह्दरा

c) बुर्जहोम

d) लुथल

उत्तर: a) आदमगढ़

व्याख्या: मध्य पाषाण काल में नागौर (राजस्थान) और आदमगढ़ (मध्यप्रदेश) से पशुपालन के प्रमाण मिले हैं।

3. मध्य पाषाण काल में किसे पहला पालतू पशु माना जाता है?

a) बकरी

b) कुत्ता

c) घोड़ा

d) गाय

उत्तर: b) कुत्ता

व्याख्या: मध्य पाषाण काल में कुत्ता पहला पालतू पशु माना जाता है।

4. मध्य गंगा घाटी के किन स्थलों से अस्थायी आवास और शव दफनाने के प्रमाण मिले हैं?

a) मह्दरा और चोपनीमांडो

b) लुथल और हड़प्पा

c) कालीबंगन और मोहनजोदड़ो

d) पयोन और लोथल

उत्तर: a) मह्दरा और चोपनीमांडो

व्याख्या: मध्य गंगा घाटी के सरायनाहरराय, चोपनीमांडो, और मह्दरा से अस्थायी आवास, पशुपालन और शव दफनाने के प्रमाण मिले हैं।


MCQs for Neolithic Age (6000-1000 BCE)


1. नवपाषाण काल में प्रमुख आविष्कार कौन सा था?

a) पहिए का आविष्कार

b) आग की खोज

c) शिल्पकला का विकास

d) धातु का उपयोग

उत्तर: b) आग की खोज

व्याख्या: नवपाषाण काल में आग की खोज हुई और कुत्ते को पालतू बनाया गया।

2. नवपाषाण काल में किस प्रकार के आवास विकसित हुए?

a) अस्थायी तंबू

b) गर्त आवास

c) गुफाओं में रहना

d) पेड़ों पर झोपड़ियां बनाना

उत्तर: b) गर्त आवास

व्याख्या: नवपाषाण काल में गर्त आवास विकसित हुए, जैसे कि बुर्जहोम से प्राप्त हुए हैं।

3. नवपाषाण काल में पॉलिश किए हुए किस प्रकार के औजारों का प्रयोग किया जाता था?

a) पत्थर के

b) धातु के

c) लकड़ी के

d) अस्थि के

उत्तर: a) पत्थर के

व्याख्या: नवपाषाण काल में पॉलिश किए हुए पत्थर के औजारों का प्रयोग होता था, जो कृषि कार्यों में मददगार थे।

4. नवपाषाण काल में मानव शवों के साथ किस जानवर को दफनाने की प्रथा थी?

a) गाय

b) भेड़

c) कुत्ता

d) बकरी

उत्तर: c) कुत्ता

व्याख्या: नवपाषाण काल में मानव शवों के साथ कुत्ते को दफनाने की प्रथा देखी गई।





सामान्य ज्ञान - प्रागैतिहासिक काल /पाषाण कालीन इतिहास

 प्रागैतिहासिक काल

  • पुरातात्विक प्रमाण की मदद से इतिहास का अध्ययन 
  • लिखित साक्ष्य का अभाव।
  • पाषाण कालीन इतिहास शामिल।
  • ब्रूस फुट द्वारा 1863 में अन्वेषण।




विभाजन:

1. पुरापाषाण काल( 5 लाख - 10 हजार  ई पूर्व )

2. मध्य पाषाण काल (10 हजार  - 6 हजार  ई पूर्व )

3. उत्तर (नव) पाषाण काल(6 हजार  - 3 हजार  ई पूर्व )

आद्य ऐतिहासिक काल

  • पुरातात्विक प्रमाण  उपलब्ध 
  • लिखित साक्ष्य भी उपलब्ध किन्तु पढ़ा नही जा सका है .
  • उदहारण - सिन्धु घाटी सभ्यता 
ऐतिहासिक काल का इतिहास - 
  • पुरातात्विक प्रमाण एवं लिखित साक्ष्य उपलब्ध है जिसे पढ़ा जा सकता है .
  • वैदिक काल से लेकर वर्तमान तक का इतिहास ऐतिहासिक कल का इतिहास कहलाता है .

पुरापाषाण काल ( 5 लाख - 10 हजार  ई पूर्व )

विभाजन:

1. निम्न पुरापाषाण काल (5 लाख - 50 हजार  ई.पू.) -इस काल में मानव ने मुख्यतः कोर उपकरणों का निर्माण किया जो क्वार्टज जैसे कठोर पत्थर से बने होते थे 

  • औजार: जैसे -हस्तकुठार, विदारिणी, चापर चापिंग।
  • स्थल : सोहन घटी (पाकिस्तान ), बेलन घाटी (इलाहाबाद , मिर्जापुर क्षेत्र ) - पाषाण काल के तीनों अवस्थाओं का साक्ष्य मिले है , डीडवाना(राजस्थान ),भीमबेटका (मध्यप्रदेश ), पल्लावरम एवं अतिरपक्कम (तमिलनाडु )
नोट - भारत का सबसे पहला हस्तकुठार पल्लावरम से राबर्ट फुट ने प्राप्त किया था .

2. मध्य पुरापाषाण काल (100000-40000 ई.पू.) - इस काल में कोर की बाजार फलक औजारों का निर्माण किया गया जो चर्ट एवं जेस्पर जैसे नरम पत्थरों के बने होते थे .

  • औजार: फलक, वेधनी, खुरचनी, तक्षणी
  • स्थल : भारत के नेवासा (गोदावर तट महाराष्ट्र ) , नर्मदा घाटी (मध्यप्रदेश )
नोट - 
  1. इसे फलक संस्कृति का कल कहा जाता है .
  2. नर्मदा घाटी में हथनौरा नामक स्थल से अरुण दोलाकिया ने एक मानव जीवाश्म प्राप्त किया जो आद्य होमो सेपिएंस का जीवाश्म माना जाता है .

3. उच्च पुरापाषाण काल (40000-10000 ई.पू.) इस काल के औजार ज्यदा विकसित एवं तेज थे , पत्थर के अलावा हड्डियों से भी औजारों का निर्माण किया जाने लगा .

  • अस्थि उपकरणों का प्रचलन।
  • पशु चित्रण (बाघ, हाथी, गैड़ा, भैंसा)।
  • आग का आविष्कार।
  • भीमबेटका गुफा खोज: बी.एस. बाकणकर, 1958


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1. प्रागैतिहासिक काल को किसके अंतर्गत रखा जाता है?

A) जब लिखित साक्ष्य उपलब्ध हों

B) जब लिखित साक्ष्य न हो

C) जब चित्रित साक्ष्य उपलब्ध हो

D) जब केवल वैदिक सभ्यता हो

उत्तर: B

व्याख्या: प्रागैतिहासिक काल वह समय है जब लिखित साक्ष्य नहीं पाए जाते। इसमें पाषाणकालीन सभ्यता सम्मिलित है।

2. पाषाणकालीन सभ्यता का सर्वप्रथम अन्वेषण किसने किया?

A) बी. एस. बाकणकर

B) ब्रूस फुट

C) अलेक्जेंडर कनिंघम

D) मोर्टिमर व्हीलर

उत्तर: B

व्याख्या: 1863 ई. में ब्रूस फुट ने पाषाणकालीन सभ्यता का पहला अन्वेषण किया।

3. निम्नलिखित में से कौन सा स्थल निम्न पुरापाषाण काल से संबंधित है?

A) भीमबेटका

B) पहलागाम

C) सिंधु घाटी

D) समानापुर

उत्तर: B

व्याख्या: पहलागाम (कश्मीर) निम्न पुरापाषाण काल का एक प्रमुख स्थल है। भीमबेटका मध्य पाषाणकाल के अंतर्गत आता है।

4. आग का आविष्कार किस काल की देन है?

A) मध्य पुरापाषाण काल

B) उच्च पुरापाषाण काल

C) निम्न पुरापाषाण काल

D) उत्तर पाषाण काल

उत्तर: B

व्याख्या: आग का आविष्कार उच्च पुरापाषाण काल में हुआ था, जो उस समय की प्रमुख उपलब्धि है।

5. भीमबेटका गुफाओं की खोज किसने की थी?

A) बी. एस. बाकणकर

B) ब्रूस फुट

C) जॉन मार्शल

D) अलेक्जेंडर कनिंघम

उत्तर: A

व्याख्या: 1958 में बी. एस. बाकणकर ने भीमबेटका गुफाओं की खोज की, जहाँ प्राचीन शैल चित्र मिले।

6. 'फलक संस्कृति' किस पुरापाषाण काल से संबंधित है?

A) निम्न पुरापाषाण काल

B) मध्य पुरापाषाण काल

C) उच्च पुरापाषाण काल

D) उत्तर पाषाण काल

उत्तर: B

व्याख्या: मध्य पुरापाषाण काल में शल्क के औजारों का इस्तेमाल किया जाता था, जिसे फलक संस्कृति के नाम से जाना जाता है।

7. निम्नलिखित में से कौन सा स्थल मध्य पुरापाषाण काल से संबंधित है?

A) सोहन घाटी

B) आदमगढ़

C) रोहिरी पहाड़ियाँ

D) वेलनघाटी

उत्तर: C

व्याख्या: रोहिरी पहाड़ियाँ (ऊपरी सिंध) मध्य पुरापाषाण काल की प्रमुख स्थल हैं।

8. पुरापाषाण काल को कितने भागों में विभाजित किया गया है?

A) 2

B) 3

C) 4

D) 5

उत्तर: B

व्याख्या: पुरापाषाण काल को तीन भागों में विभाजित किया गया है: निम्न, मध्य, और उच्च पुरापाषाण काल।

9. निम्न पुरापाषाण काल में प्रमुख औजार कौन से थे?

A) हस्तकुठार और विदारिणी

B) शल्क और फलक

C) अस्थि उपकरण

D) तक्षणी और वेधनी

उत्तर: A

व्याख्या: निम्न पुरापाषाण काल में हस्तकुठार और विदारिणी प्रमुख औजार थे, जो पत्थरों से बनाए जाते थे।

10. सिंधु घाटी सभ्यता किस काल से संबंधित है?

A) प्रागैतिहासिक काल

B) आद्य ऐतिहासिक काल

C) ऐतिहासिक काल

D) नवपाषाण काल

उत्तर: B

व्याख्या: सिंधु घाटी सभ्यता आद्य ऐतिहासिक काल का हिस्सा है, जहाँ लिखित साक्ष्य तो हैं लेकिन अभी तक पूरी तरह पढ़े नहीं जा सके हैं।




सरकारी नौकरी - इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) में ग्रामीण डाक सेवक (GDS) कार्यकारी के रूप में कार्य करने का अवसर


इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB), जो संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग की एक सरकारी इकाई है, ने ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) के लिए एक विशेष अवसर की घोषणा की है। IPPB, देश के ग्रामीण इलाकों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए, 344 ग्रामीण डाक सेवकों को कार्यकारी (Executive) के रूप में नियुक्त करने जा रहा है। यह भर्ती प्रक्रिया डाक विभाग के विशाल नेटवर्क, जिसमें 1.55 लाख से अधिक डाकघर और 3 लाख से अधिक डाक सेवक और GDS शामिल हैं, के माध्यम से घर-घर बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से की जा रही है।





पद और महत्वपूर्ण तिथियां


पद: GDS कार्यकारी (Executive)


कुल पद: 344 (संभावित, आवश्यकतानुसार बदल सकते हैं)


ऑनलाइन आवेदन की अवधि: 11 अक्टूबर 2024 से 31 अक्टूबर 2024 तक

आवेदन की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2024

पात्रता मानदंड

आयु: 1 सितंबर 2024 को 20 से 35 वर्ष के बीच

शैक्षिक योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से स्नातक (नियमित/डिस्टेंस लर्निंग)

अनुभव: न्यूनतम 2 वर्ष का अनुभव ग्रामीण डाक सेवक (GDS) के रूप में

अन्य आवश्यकताएँ: आवेदन करते समय कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई या सतर्कता मामला लंबित नहीं होना चाहिए।

चयन प्रक्रिया

चयन स्नातक में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। यदि दो उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो डाक विभाग में उनकी वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद भी यदि समानता होती है, तो जन्म तिथि के आधार पर चयन किया जाएगा। उम्मीदवारों की दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया भी होगी, जिसमें उन्हें नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने होंगे। अंतिम चयनित उम्मीदवारों की सूची IPPB की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी।

वेतन और भत्ते

चयनित ग्रामीण डाक सेवकों को ₹30,000 मासिक एकमुश्त वेतन दिया जाएगा, जिसमें सभी वैधानिक कटौतियां शामिल होंगी। प्रदर्शन के आधार पर वार्षिक वेतन वृद्धि और प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे। इसके अलावा किसी अन्य प्रकार के भत्ते या बोनस का प्रावधान नहीं है।

आवेदन शुल्क

सभी उम्मीदवारों को ₹750 का गैर-वापसी योग्य आवेदन शुल्क जमा करना होगा। उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, क्योंकि एक बार जमा किया गया शुल्क वापस नहीं किया जाएगा।

आवेदन प्रक्रिया

योग्य और इच्छुक ग्रामीण डाक सेवक 11 अक्टूबर 2024 से 31 अक्टूबर 2024 तक IPPB की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए जल्द से जल्द आवेदन करें।

आधिकारिक वेबसाइट :- www.ippbonline.com

आधिकारिक नोटिफिकेशन :-Click here

ऑनलाइन आवेदन करने का लिंक :- https://www.ippbonline.com/web/ippb/current-openings

कैरियर - प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना: रोजगार हेतु निःशुल्क प्रशिक्षण

 भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में घोषित प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआईवाई) का उद्देश्य देश के युवाओं को वास्तविक जीवन के कारोबारी वातावरण का अनुभव कराकर रोजगार क्षमता को बढ़ावा देना है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, अगले पांच वर्षों में शीर्ष 500 कंपनियों में एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना की शुरुआत एक पायलट परियोजना के रूप में हो रही है, जिसमें 2024-25 के दौरान 1.25 लाख युवाओं को इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा।


योजना का उद्देश्य

इस योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उनके शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटने के लिए व्यावसायिक अनुभव प्रदान करना है। इससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी और उन्हें विभिन्न उद्योगों में अपने कौशल को निखारने का अवसर मिलेगा।

पात्रता मानदंड

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के लिए पात्रता मानदंड निम्नलिखित हैं:

आयु सीमा: 21 से 24 वर्ष के बीच के भारतीय युवा पात्र होंगे।

शैक्षिक योग्यताएँ: हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी, आईटीआई, डिप्लोमा, या स्नातक डिग्री (बीए, बीएससी, बीकॉम आदि) धारक इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।

अयोग्यता: आईआईटी, आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के स्नातक, उच्च शैक्षिक योग्यताओं वाले उम्मीदवार, और जिनके परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक है, वे आवेदन नहीं कर सकते।

पायलट परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

1. इंटर्नशिप की अवधि: इंटर्नशिप की अवधि 12 महीने होगी, जिसमें से कम से कम 6 महीने व्यावहारिक कार्य अनुभव के रूप में होने चाहिए।

2. मासिक सहायता: इंटर्न को 5,000 रुपये मासिक सहायता दी जाएगी, जिसमें 500 रुपये कंपनी द्वारा दिए जाएंगे और 4,500 रुपये सरकार डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) के माध्यम से प्रदान करेगी।

3. शॉर्टलिस्टिंग और चयन: पोर्टल के माध्यम से कंपनियाँ उम्मीदवारों का चयन करेंगी। इस प्रक्रिया में सामाजिक समावेशिता और विविधता को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे अनुसूचित जाति, जनजाति, और अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को समान अवसर मिल सके।

योजना के लाभ

इस योजना के तहत मिलने वाले अनुभव से युवाओं को उनके करियर की दिशा निर्धारित करने में मदद मिलेगी। इंटर्नशिप का व्यावहारिक अनुभव उन्हें विभिन्न उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षित करेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त, युवाओं को 12 महीने तक मासिक सहायता और आकस्मिक व्यय के लिए 6,000 रुपये का अनुदान भी मिलेगा।

कंपनियों की भागीदारी

योजना में शीर्ष 500 कंपनियों को शामिल किया गया है, जो पिछले तीन वर्षों के सीएसआर खर्च के आधार पर चुनी गई हैं। कंपनियाँ अपनी आपूर्ति श्रृंखला में शामिल संस्थानों या समूह की अन्य कंपनियों के साथ गठजोड़ करके भी इंटर्नशिप प्रदान कर सकती हैं।

आधिकारिक वेबसाइट - https://pminternship.mca.gov.in/login/

आधिकारिक नोटिफिकेशन -

https://pminternship.mca.gov.in/assets/docs/PMIS_Guidelines_hindi.pdf

कंप्यूटर सामान्य ज्ञान - इनपुट डिवाइस


इनपुट डिवाइस क्या हैं?

इनपुट डिवाइस वे उपकरण होते हैं जिनका उपयोग हम कंप्यूटर में डाटा इनपुट करने या उसे कमांड देने के लिए करते हैं। ये उपकरण कंप्यूटर को सूचना और निर्देश प्रदान करते हैं, जिससे वह उसे प्रोसेस कर सके।




मुख्य प्रकार के इनपुट डिवाइस:


1. कीबोर्ड (Keyboard):

एक टाइपिंग इनपुट डिवाइस, जो टेक्स्ट और संख्याओं को इनपुट करने के लिए उपयोग किया जाता है।

2. माउस (Mouse):

एक प्वाइंटिंग इनपुट डिवाइस, जिसका उपयोग स्क्रीन पर किसी भी ऑब्जेक्ट को सेलेक्ट करने या कमांड देने के लिए किया जाता है।

3. जॉयस्टिक (Joystick):

यह मुख्य रूप से गेमिंग इनपुट डिवाइस होता है, जो 3D मूवमेंट के लिए उपयोग होता है।

4. ट्रैक बॉल (Trackball):

यह भी गेमिंग और ग्राफिक्स डिजाइनिंग के लिए उपयोग किया जाने वाला इनपुट डिवाइस है, जिसमें माउस की तरह एक बॉल होती है जिसे रोल किया जाता है।

5. स्कैनर (Scanner):

यह डिवाइस किसी पृष्ठ पर बने टेक्स्ट या इमेज को हूबहू कंप्यूटर में इनपुट कराता है।

इसके प्रकार हैं:

MICR (Magnetic Ink Character Recognition): बैंक चेक आदि में इस्तेमाल।

OCR (Optical Character Recognition): छपे हुए टेक्स्ट को डिजिटल रूप में बदलने के लिए।

OBR (Optical Bar Code Reader): बारकोड को स्कैन करने के लिए।

6. वेबकैम (Webcam):

यह वीडियो या इमेज इनपुट डिवाइस होता है, जिसका उपयोग लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग या वीडियो कॉलिंग के लिए किया जाता है।

7. टच स्क्रीन (Touch Screen):

यह इनपुट और आउटपुट दोनों प्रकार का डिवाइस होता है, जिसमें उपयोगकर्ता स्क्रीन पर टच करके निर्देश दे सकता है।

8. माइक्रोफोन (Microphone):

यह डिवाइस ऑडियो को इनपुट करने के लिए उपयोग होता है, जैसे कि आवाज़ को रिकॉर्ड करना या वॉयस कमांड देना।